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बिलाड़ा तहसील जोधपुर के आई माता मंदिर में गुर्जर जाति के लोगों का प्रवेश निषिद्ध क्यों है?

 गुर्जरों में वीर बघरावत सवाईभोज कि तीसरी रानी जयमती अम्बा का प्रथम अंश (अवतार)थी ।जिसके लिए दुर्जनसाल से युद्ध हुआ और भोज चौहान (बाघरावत 24 भाइयों) शहीद हुए । जिसके कारण गुर्जर जयमती [ अम्बे ]को ज़िम्मेदार को मानते हे क्योंकि अम्बे द्वारा ही उनको खाँड़ (तलवार) दी और भोज अम्बे अंश के लिए ही मरे । सिरवी जाती कि कुलदेवी श्री आई माता की अम्बा का ही अवतार थी और उन्होंने अपनी कर्मभूमि बिलाड़ा को बनाया क्योंकि सवाईभोज की जन्मभूमि ही बिलाड़ा (हर्षदेवल) थी गुर्जर लगभग 1550–1500 के पूर्व यहाँ पर थे ही नही उन्होंने 1000 -1100 में ही गायों के चारे हेतु राज. के पूर्व की और चले गए । किंतु बाद में यहाँ कुछ गुर्जरों का पिचियाक नामक स्थान पर बसावट के साक्ष्य खरिया मिठापूर नामक गाव स्थापना 1650 (लगभग) सांभा जी खाटरा करते हे उसके बाद से वहाँ पर गुर्जरों की नाममात्र जनसंख्या हे  और बानगंगा मेले में ग़ैर (डांडिया) नाच का नेतृत्व ही खारिया के गुर्जर ही करते हे किंतु वर्तमान समय में खारिया के व्यक्ति करते हे के नही इसका कोई पुख़्ता प्रमाण नही । चूंकि गुर्जर आई माता को बगड़ावत युद्ध के लिए जिम्मेदार...